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कॉर्पोरेट जानकारी

सर्वश्रेष्ठ बनने की दिशा में लगातार प्रयत्न करने से कॉर्पोरेट विश्‍व में सफलता हासिल की जा सकती है। 1976 के बाद राष्ट्रीयकरण के कारण हमारी उन्नति अभूतपूर्व रही। फॉरच्यून 500 और फोर्ब्स 2000 की सूची में अकेले भारत का प्रतिनिधित्व करनेवाली कंपनियों में हमारी कंपनी को अक्सर "पीएसयू के कब्ज़े में एमएनसी" कहा जाता है। विपणन (मार्केटिंग) के क्षेत्र में अग्रणीय एक ऐसी कंपनी जो "बेस्ट इन क्लास" की प्रथा नियोजित करती है।

थोड़े समय के लिए अतीत में झांकिए क्योंकि हम आपको भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की विकास कथा में पीछे की ओर ले जा रहे हैं। भारतीय उद्योग के इतिहास का एक नया अध्याय।

बीपीसीएल की संकल्पना एक नहीं कई हैं।

निदेशक मंडल की समीक्षा

वर्ष के लिए बीपीसीएल की वार्षिक रिपोर्ट

इस नीतिपरक (संहिता) को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (कंपनी) बोर्ड के सदस्यों एवं वरिष्ठ मैनेजमेंट कार्मिकों की आचार संहिता कहा जाएगा।

यह विभाग कॉर्पोरेट श्रेष्ठता के लिए सतर्कता की अवधारणा के साथ कार्य करता है। पूर्वलक्षी सतर्कता का रूख अपनाते हुए बीपीसीएल की लगातार यह कोशिश होती है कि वह बेहतर प्रणालियों, प्रक्रियाओं और प्रथाओं को बढ़ावा दे। इसका ऐसा मानना है कि सर्वोत्तम प्रथाओं, पर्याप्त नियंत्रणों एवं परदर्शिता से लिए गए निर्णय व्यावसायिक दृष्टि से योग्य, प्रभावी और सामंजस्य पूर्ण होते हैं जो अंतत: कॉर्पोरेट श्रेष्ठता की ओर ले जाते हैं।

रिपोर्ट 2006-2007 प्रर्यावलोकन के लिए

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), एक फॉर्च्यून 500 तेल परिशोधन, अनुसंधान एवं विपणन पीएसयू है जिसे नवरत्न का दर्जा प्राप्त है। 1976 में राष्ट्रीयकरण के बाद बीपीसीएल ने अपना रूख बदलते हुए वृद्धि के पथ पर तेजी से अपने पैर जमाना शुरू किये। कुल बिक्री, लाभप्रदता और आर्थिक प्रारक्षित निधि में दिन दूनी राज चौगुनी उन्नति हुई।

हमें कुछ पेंशनभोगियों से यह सुझाव प्राप्त हुआ कि उनके नाम और पते बीपीसीएल की वेबसाइट में प्रदर्शित किए जाएं ताकि पुराने सहकर्मी और दोस्त एक दूसरे से मेल-जोल रख सकें।

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